आरती
आरती एक पवित्र भक्ति गीत है जो पूजा के दौरान भगवान के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और समर्पण भाव प्रकट करने के लिए गाया जाता है। इसमें घी या तेल से जलाया गया दीपक अर्पित किया जाता है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर दिव्य प्रकाश का प्रतीक है।
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हनुमान चालीसा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बजरंग बाण
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥ पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥ यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥ धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

सुंदरकांड पाठ
संपूर्ण सुंदरकांड पाठ हिंदी में, जामवंत के बचन सुहाए, सुनि हनुमंत हृदय अति भाए.

मने अच्छा लागे से: भजन
तेरा सालासर दरबार तने पूजे यो संसार, तेरी गूंजे जय जयकार मने अच्छा लागे से

संकट मोचन हनुमानाष्टक
श्री हनुमंत लाल की पूजा आराधना में संकट मोचन हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भक्तों पर आये गंभीर संकट का भी निवारण हो जाता है।
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विशेष सामग्री

सुंदरकांड पाठ
संपूर्ण सुंदरकांड पाठ हिंदी में, जामवंत के बचन सुहाए, सुनि हनुमंत हृदय अति भाए.

हनुमान चालीसा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

हनुमान आरती
श्री हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार व्रत, शनिवार पूजा, बूढ़े मंगलवार और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाली श्री हनुमान आरती है।

बजरंग बाण
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥ पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥ यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥ धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

संकट मोचन हनुमानाष्टक
श्री हनुमंत लाल की पूजा आराधना में संकट मोचन हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भक्तों पर आये गंभीर संकट का भी निवारण हो जाता है।